नई दिल्ली : केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर करीब 36 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच प्रधान के इस्तीफे को विपक्षी दलों ने बड़ी राजनीतिक और लोकतांत्रिक जीत बताया है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच जहां जश्न का माहौल देखने को मिला, वहीं विपक्षी नेताओं ने सरकार पर जमकर निशाना साधा।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे भारत के युवाओं की जीत बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के युवाओं पर गर्व है। प्रियंका गांधी के बयान के बाद कांग्रेस समर्थकों और छात्र आंदोलन से जुड़े लोगों ने इसे युवाओं की आवाज की जीत के तौर पर पेश किया।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने छात्रों से बातचीत कर यह फैसला पहले ही क्यों नहीं लिया। अखिलेश यादव ने कहा कि यह नई पीढ़ी के लोगों की बड़ी जीत है। उन्होंने सरकार को शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई। साथ ही पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए बड़ी जीत बताते हुए देशवासियों को बधाई दी।
AAP सांसद संजय सिंह ने छात्र आंदोलन को सरकार के खिलाफ बड़ी सफलता बताया। उन्होंने कहा कि देश के लाखों युवाओं ने अपने आंदोलन के जरिए सरकार को जगाने का काम किया और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के लिए मजबूर कर दिया। संजय सिंह ने दावा किया कि पेपर लीक के मुद्दे से शुरू हुई यह लड़ाई अब रोजगार और जवाबदेही जैसे बड़े मुद्दों तक जाएगी। उन्होंने आंदोलन से जुड़े युवाओं को जीत की बधाई भी दी।
वहीं, बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों के हित को सबसे ऊपर रखते हैं और छात्र उनके हर फैसले का सम्मान करते हैं। बीजेपी की ओर से इस घटनाक्रम को सरकार की संवेदनशीलता और छात्रों के हित में लिए गए फैसले के तौर पर देखा जा रहा है।
AAP नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने सिर्फ इस्तीफा नहीं दिया, बल्कि देश की युवा पीढ़ी, छात्रों और Gen Z ने उनका इस्तीफा लिया है। सिसोदिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए उन पर अहंकार का आरोप लगाया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे छात्र आंदोलन और युवाओं की जीत बता रहा है, वहीं बीजेपी इसे छात्रों के हित में सरकार के फैसले के रूप में पेश कर रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है और NEET समेत देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार आगे क्या कदम उठाती है।

